पूर्व मंत्री का विस्फोटक पत्र :बालको प्रबंधन पर ‘Fraud on Tribunal’ के गंभीर आरोप
- Media Samvad Editor
- Dec 18, 2025
- 3 min read
कोरबा | 18 दिसंबर
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 14.11.2022 को पारित स्पष्ट, अंतिम एवं बाध्यकारी आदेश की जानबूझकर, सचेत और दुर्भावनापूर्ण अवहेलना का एक अत्यंत गंभीर मामला सामने आया है। यह प्रकरण केवल किसी तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि माननीय अधिकरण को गुमराह कर असत्य घोषणाओं के आधार पर Consent to Establish (CTE) एवं Consent to Operate (CTO) प्राप्त करने का है, जो विधि की दृष्टि में Fraud on Tribunal तथा Wilful Disobedience amounting to Contempt की श्रेणी में आता है।
छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल द्वारा इस विषय में माननीय अध्यक्ष, NGT, प्रधान पीठ, नई दिल्ली को विस्तृत एवं विधिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया है। वहीं, कोरबा जिला कांग्रेस समिति ने इसे पर्यावरण, कानून एवं लोकतांत्रिक शासन पर सीधा हमला बताते हुए कठोर कार्रवाई की माँग की है।
NGT का स्पष्ट आदेश : कोई छूट नहीं, कोई विवेकाधिकार नहीं
माननीय NGT ने अपने आदेश के अनुच्छेद-20 में स्पष्ट बालको के द्वारा शपथ पर दिए गए कथन को वर्णित करते हुए कहा :—
"Town & Country Planning विभाग तथा नगर पालिक निगम की पूर्व स्वीकृति के बिना किसी भी स्थिति में किसी औद्योगिक इकाई को CTE एवं CTO प्रदान नहीं किया जा सकता।"


BALCO की घोषणा बनाम दस्तावेज़ी सच्चाई
BALCO द्वारा अधिकरण के समक्ष यह सकारात्मक घोषणा की गई कि सभी आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त कर ली गई हैं, जबकि अभिलेखीय तथ्य यह सिद्ध करते हैं कि—
नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (Town & Country Planning) की अनुमति 24.11.2023
नगर पालिक निगम, कोरबा की भवन अनुमति 13.02.2024
अर्थात NGT आदेश दिनांक 14.11.2022 की तिथि पर कोई भी वैध अनुमति अस्तित्व में नहीं थी।इसके बावजूद तथ्यों को छिपाकर एवं असत्य घोषणा के आधार पर CTE/CTO प्राप्त करना सचेत, योजनाबद्ध एवं दुर्भावनापूर्ण कृत्य है।
सबसे गंभीर तथ्य : Red Category उद्योग को ‘Pollution Free’ बताकर अनुमति
इस पूरे प्रकरण में एक और अत्यंत चौंकाने वाला और आपराधिक तथ्य सामने आता है, जो इस मामले को साधारण अवहेलना से कहीं आगे ले जाता है।
Town & Country Planning विभाग, कोरबा द्वारा जारी विकास अनुमति दिनांक 24.11.2023 में BALCO के उद्योग को—
“Industrial-1 (Green & Orange Category – Pollution Free Industry)”
के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
❗ यह घोषणा पूर्णतः असत्य और कानून के विपरीत है
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक औद्योगिक वर्गीकरण के अनुसार—
Aluminium Smelter Red Category (अत्यधिक प्रदूषणकारी) - Pollution Index (PI) ≈ 99.1
Aluminium Processing / Refinery Red Category- Pollution Index (PI) ≈ 96.6
यह वर्गीकरण वैधानिक, वैज्ञानिक एवं बाध्यकारी है।
इसके बावजूद एक Red Category (Extreme Polluting) उद्योग को Green/Orange/Pollution Free बताना—
केवल तथ्यात्मक गलती नहीं,
बल्कि Regulatory Fraud,
और स्पष्ट प्रशासनिक भ्रष्टाचार का प्रमाण है।
यह कृत्य CPCB की Industrial Siting Policy, Precautionary Principle तथा Environmental Rule of Law का खुला उल्लंघन है।
कानूनी स्थिति : Fraud सब कुछ शून्य कर देता है
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित सिद्धांत इस विषय में पूर्णतः स्पष्ट हैं—
S.P. Chengalvaraya Naidu v. Jagannath (1994)“Fraud vitiates everything.”
A.V. Papayya Sastry v. Govt. of A.P. (2007)महत्वपूर्ण तथ्यों का दमन स्वयं में Fraud है।
DDA v. Skipper Construction (1996)जानबूझकर अवहेलना न्यायालय/अधिकरण की गरिमा को कमजोर करती है।
इन सिद्धांतों के आलोक में BALCO का पूरा कृत्य Fraud on Tribunal तथा Wilful Disobedience amounting to Contempt है।
दूरगामी एवं खतरनाक प्रभाव
यदि NGT जैसे संवैधानिक अधिकरण के आदेशों की इस प्रकार अवहेलना पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो—
Rule of Law कमजोर होगा,
पर्यावरणीय शासन मज़ाक बन जाएगा,
और यह संदेश जाएगा कि बड़े कॉरपोरेट कानून से ऊपर हैं।
जनहित में माँगें
इस गंभीर प्रकरण में निम्नलिखित माँगें की गई हैं—
BALCO को जारी CTE एवं CTO को प्रारंभ से ही शून्य (Void ab initio) घोषित किया जाए।
यह घोषित किया जाए कि उक्त अनुमतियाँ Fraud on Tribunal के माध्यम से प्राप्त की गई हैं।
BALCO के कृत्य को Wilful Disobedience of NGT Order माना जाए।
संबंधित अधिकारियों/प्राधिकारियों की भूमिका की जाँच कर उत्तरदायित्व तय किया जाए।
पर्यावरण कानूनों एवं NGT आदेशों की अवहेलना हेतु कठोर, दंडात्मक एवं उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
यह मामला केवल BALCO का नहीं है।यह प्रश्न है—
क्या कानून सबके लिए समान है?और क्या NGT जैसे संवैधानिक संस्थानों की गरिमा की रक्षा की जाएगी?
अब देश की निगाहें माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण पर टिकी हैं।























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