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श्रमिकों के शोषण की बेड़ियाँ: न्याय की हत्या

  • Media Samvad Editor
  • Sep 11, 2024
  • 3 min read

वेदांता/बालको:एक ऐसा सिस्टम, जिसने मानवता को नजरअंदाज कर दिया है


विजेंद्र कुमार(मंटू उईके), एक समर्पित कर्मचारी और सत्ताधारी पार्टी के अनुसूचित जनजाति शाखा के स्थानीय मंडल अध्यक्ष, एक ऐसे तूफान के केंद्र में हैं जो आधुनिक श्रम शोषण के सबसे काले युग को दर्शाता है। अपने राजनीतिक संबंधों के बावजूद, बालको की एल्युमिनियम स्मेल्टिंग फैक्ट्री में उनके संघर्ष ने कॉर्पोरेट और सरकारी मिलीभगत की कठोर सच्चाई को उजागर किया है, जो हाशिये पर खड़े समुदायों को दबाने का काम कर रही है।


यह उम्मीद की जाती है कि जब छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री खुद कोरबा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो विजेंद्र जैसे श्रमिकों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन, यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि इन अमानवीय कार्यों का बेरोक-टोक सिलसिला सरकार की नाक के नीचे जारी है। विजेंद्र, जो पहले से ही खतरनाक कार्य स्थितियों के कारण स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, हाल ही में प्रबंधन द्वारा बिना किसी सबूत के "शराबी," "दंगाई" और "अवैध सट्टेबाजी" के आरोपों में विजेंद्र कुमार को दोषी करार देते हुए, सेवा से बर्खास्त कर दिया है|


गंभीर तथ्य यह है कि एक व्यक्ति पर ऐसे संगीन आरोप लगाना और बिना साक्ष्यों, अथवा उसकी जानकारी के बिना उसे दोषी करार देने का कृत्य तो शायद अंग्रेजों के शासन-काल में भी नहीं होता होगा, परंतु विजेंद्र कुमार को इन सभी आरोपों में दोषी घोषित कर दंड भी दे दिया गया है| जैसा की पाठकों को ज्ञात है, कि बालको के वेदांता प्रबंधन द्वारा नए मापदंड स्थापित करने में सबसे अग्रणी भूमिका रहती है| इस नए मापदंड को भी स्वीकार करने की मजबूरी है, क्योंकि ताकतवर प्रबंधन के विरोध में न्याय की अपेक्षा करना, फिलहाल तो अकल्पनीय है|


इस शोषण की सीमा अब नई निचली स्थिति पर पहुँच गई है, जहाँ बालको का प्रबंधन अजेय दिखता है, जो लगातार सत्ता में बैठे लोगों का समर्थन प्राप्त कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक योजनाबद्ध रणनीति है, यहाँ तक कि छत्तीसगढ़ का श्रम विभाग भी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए नई यूनियन पंजीकृत करने को टाल रहा है। सरकारी निकायों और कॉर्पोरेट संस्थाओं के बीच यह अपवित्र गठबंधन मानवता के लिए पूर्ण उपेक्षा का परिणाम है। और मानवता के ताबूत में इस घटना नें एक कील और लगा दिया गया है |


विजेंद्र(मंटू उईके ) के कथन अनुसार एस. एस. ई कॉन्ट्रेक्टस प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधक राधाकान्त राय द्वारा बालको प्रबंधन के एच. आर अधिकारियों के साथ मिल कर, सुनियोजित षड्यन्त्र के तहत उन्हें झूठे आरोपों में अपराधी बनाया गया है और इस कारण वह अपने परिवार और समुदाय में अत्यंत अपमान का सामना कर रहे हैं| और इस कारण उनकी सामाजिक एवं समुदाय मे प्रतिष्ठा पर अत्यंत ठेस पहुंची है , उनके द्वारा राधाकान्त राय के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु आवेदन बनाया गया है |


विजेंद्र का मामला अकेला नहीं है। पूरे क्षेत्र में श्रमिक गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, और कई लोग बोलने से डरते हैं, यह जानते हुए कि उनके साथ भी ऐसा ही होगा। गेट पासों का अवरोध, झूठे आरोप और लगातार धमकियाँ सभी उनके खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली रणनीतियाँ हैं।


ऐसा लगता है कि मानवता का युग समाप्त हो गया है। इसके स्थान पर, एक अंतहीन अंधकार छा गया है—एक ऐसा युग जहाँ न्याय एक दूर का सपना बन गया है और शोषण एक सामान्य स्थिति। जिस समर्थन प्रणाली को सबसे कमजोरों की रक्षा करनी चाहिए थी, वही उनके उत्पीड़कों का समर्थन कर रही है। यह केवल विजेंद्र की लड़ाई नहीं है; यह उन सभी हाशिये पर खड़े लोगों की लड़ाई है, जिन्हें असीमित शक्ति और कॉर्पोरेट लालच द्वारा व्यवस्थित रूप से मिटाया जा रहा है।


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